रेप क्यों होते है – The Real Reason Behind Rape

आज कल न्यूज़ में, अख़बार में, Facebook, Twitter और हर जगह जो चीज़ सामने आती है वो है बलात्कार (Rape) के मामले । कई बार ऐसा लगता है, कि ये क्या हो रहा है ? लोग ऐसा क्यों कर रहे है! जब ये सुनने को मिलता है कि एक स्कूल के कर्मचारी ने स्कूल में पढ़ने वाली 8 साल कि बच्ची का बलात्कार किया तो दिल तड़प उठता है, ऐसे वाकयों पर यकीन नही होता कि कोई इतना बेरहम कैसे हो सकता है, इस तरह के हालत में लोग कहते है कि..

Rape Kyu Hote Hai

रेप क्यों होते है ?

मैं इसका जवाब में दे रहा हूँ, अगर आपको अच्छा लगे तो कमेंट्स और शेयर जरूर करें…

एक 8 साल के लड़के ने एक थियेटर में राजा हरिश्चंद्र का नाटक देखा, जिसमे दिखाया गया कि कैसे राजा हरिश्चंद्र ने सच्चाई के लिए संघर्ष किया… उस नाटक का उस बच्चे के कोमल मन पर ऐसा प्रभाव पड़ा की उसने कसम खा ली की मैं कभी झूठ नहीं बोलूंगा । ये लड़का आगे चलकर महात्मा गांधी के नाम से विख्यात हुआ ।

अब ये बात तो हम सब जानते है कि कोई जिस माहोल में रहता है वैसा ही हो जाता है, बचपन में हम सबने चिड़िया के दो बच्चों की कहानी पढ़ी है जिसमे, एक जंगल में एक चिड़ियाँ का परिवार रहता है, उसके छोटे छोटे २ बेटे होते है, जो उसकी हर बात मानते है, एक दिन भयंकर आंधी आती है और वो दोनों बेटे माँ से अलग हो जाते है, एक साधुओं के आश्रम में चला जाता है और दूसरा गुंडे मवालियों के बीच रहने लगता है, कुछ सालों बाद जब वो चिड़िया अपने एक बेटे से मिलती है तो वो उसे पुरे सादर भाव से प्रणाम करता है और साधुओं के साथ रहते हुए संस्कारी होने के कारण अपनी माता की सेवा करता है, फिर चिड़िया दूसरे बेटे की खोज में चली जाती है और आख़िरकार वो उसे धुंध लेती है, लेकिन वो उसे कोई इज्जत नही देता, उसके बजाये बात बात में गालियां देता है । ये कहानी ये बहुत अच्छी तरह से साबित करती है कि हमारे आस पास की होने वाली चीज़ों और कामों का हमारे दिमाग और आचरण पर सीधा असर पड़ता है ।

अब हम इसी कहानी को अपने समाज के साथ जोड़ कर देखते है ।

आज 6 साल की उम्र से ही मासूम बच्चे टीवी में नंगापन देखते है, क्योंकि उनकी माँ भी देखती है उसका बाप भी देखता, उसके भाई – बहन सब देखते है, आपको याद होगा एक टाइम था जब बड़े टीवी पर एक Kiss सीन आने पर तुरंत चैनल चेंज कर दिया करते थे और बच्चों के सामने असहज महसूस करते थे और आज Sunny Leone almost नंगी अवस्था में कहती है – “जब सुबह शुरू हो.. जब शाम खत्म हो… बेवजह… बेवक्त… जब ख्वाइश हो.. कभी Coutch पर, कहीं जाने से पहले….. Manforce Strawberry Flavored Condom” – तब भी किसी को ये गलत नहीं लगता । उनकी दीदी, पड़ोस में रहने वाली लड़कियां, सविता भाभी भी छोटे कपडे पहनती है । सड़क में अर्धनग्न अप्सराये बच्चों को आसानी से दिख जाती है और जब तक बच्चा 18 साल का होता है तब तक हज़ारो चुम्मा-चाटी, रेप और सेक्स के सीन फ़िल्म – टीवी के माध्यम से देख चुका होता है । और इन सब को आज का नंगा समाज गलत भी नहीं मानता ।

ऐसे में बच्चा साधू या महापुरुष कैसे बनेगा, बलात्कारी ही बनेगा…

दोस्तो बात सच है इसलिए कडवी है, बलात्कार के लिये काफी हद तक बच्चो की परवरिश और हमारे चारो ओर का माहौल भी काफी हद तक जिम्मेदार है ।

अपने घर के बच्चों, लड़के – लड़कियों को सही संस्कार सिखाये, गलत करने पर मारने पीटने से पहले उन्हें ढंग से ये समझाये कि, सही क्या है और गलत क्या है । अगर पहले आप उन्हें ये नही सिखाते कि गलत और सही क्या है तो गलत करने पर आपका उनको डाटना या मारना आपकी मूर्खता है क्यूंकि आपने उन्हें ये तो बताया ही नही कि जो वो कर रहे है वो गलत है और उन्हें इसकी बजाए क्या करना चाहिए ।

एक बात और कि, बच्चों में संस्कार एक दिन में नही भरे जा सकते, जैसे जिन्दा रहने के लिए हम एक दिन में पूरी ज़िंदगी का खाना नही खा सकते, हमे रोज थोड़ा थोड़ा खाने कि जरूरत होती है उसी तरह अच्छे चरित्र के लिए बच्चों को नियमित सही चीज़ों का ज्ञान देना जरूरी है ।

TV ने आज कल के बच्चों, और खासकर लड़कियों और औरतों का दिमाग खराब कर के रखा हुआ है Star Plus, Zee TV और ऐसे दर्जनों टीवी चैनलों पर दिन रात ऐसी चीज़ें धड़ल्ले से दिखाई जा रही है जिससे महिलाओं के दिमाग में जहर भरा जा रहा है जिसका सीधा असर पारिवारिक रिश्तों पर पड़ता है । उन्हें इससे दूर रखें, लेकिन ध्यान रहे कि आपका तरीका गलत ना हो ।

जब आप बच्चे को कुछ सिखाते है तो ध्यान रखें की आप खुद भी उन बातों का पालन करते हो या काम से काम उनके सामने तो ये जरूर दिखाए की आप वो करते हो, जैसे यदि आप अपने बच्चे को सिखाते हो की – बेटे सुबह उठने के बाद दादा – दादी को प्रणाम जरूर करना चाहिए, और आप खुद भी सुबह उठने पर बच्चों के सामने उन्हें प्रणाम करते हो बच्चे बहुत जल्दी सीख जाते है ।

मैं अपने छोटे भाई को बहुत टाइम से सिखाता था की जिस दिन स्कूल की छुट्टी हो उस दिन सुबह उठने के बाद नहा धो कर मंदिर जरूर जाया कर, पर वो नहीं जाता था । फिर कुछ दिनों पहले मेरी मम्मी ने पंडित जी को मेरी कुंडली दिखाई, क्यूंकि मेरा काम में बहुत नुकसान हो रहा था तो पंडित जी ने मुझे कुछ उपाए बताये (हाँ उन उपाए ने बहुत असर डाला, पर इस बारे में डिटेल में फिर कभी बताऊंगा) जिनमे से एक था, कि प्रतिदिन सुबह मंदिर जाना है और शिवलिंग पर जल चढ़ाना है, मैं जाने लगा । अब मेरा भाई बिना कहे छुट्टी वाले दिन सुबह और हर मंगलवार को मंदिर जाता है क्यूंकि मैं भी जाता हूँ ।

कहानी का सार है कि.. अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें, उन्हें सही और गलत बातों का फर्क बताये और किस समय क्या काम करने चाहिए समझाएं । दुनिया में हर किस्म के लोग है, भलाई इसी में है कि खुद मजबूत रहें, आस पास के माहोल को अच्छे से अच्छा रखने कि कोशिश करें और सही रास्ते पर चलें ।

धन्यवाद ।

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